कुछ पुराने पन्ने -कविताएं और दोहे


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मुझे हिंदी कविताएं और दोहे बेहद पसंद है, पढ़ना भी और लिखना भी..आज अपने स्कूल का ज़माना बहुत याद आता है जब हमे हिंदी की क्लास में कविताएं पढाई जाती थी, हम पढ़ तो लेते थे पर तब उन कविताओं का वास्तविक जीवन में क्या अर्थ है यह समझ पाना कठिन होता था.

आज जब ज़िन्दगी में थोड़ा आगे बढ़ने लगे है, उम्र के पड़ाव पार करने लगे है कुछ कविताएं और कुछ पुराणी कहावते खुद बा खुद संगीत की मधुर ध्वनि की तरह ज़ेहन में गुनगुनाने लगती है.

आज वो कविताएं मैं ढूंढ ढूंढ कर पढ़ती हूँ, उनकी किताब ऑनलाइन आर्डर करती हूँ.

कुछ कविताये और दोहे यहाँ जोड़ने की कोशिश कर रही हूँ,जिनसे हमे ज़िन्दगी जीने का हौसला मिलता है और नहीं प्रेरणा मिलती है, उम्मीद है आपने भी ये कविताएँ सुनी होगी.

१) हिम्मत करने वालो की हार नहीं होती,
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती

नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगो में सहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है

आखिर उसकी म्हणत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती
— सोहन लाल

२) वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने, हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी
मांग मत! मांग मत! मांग मत!
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!

तू न थकेगा कभी,
तू न थमेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ! कर शपथ! कर शपथ!
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु, स्वेद, रक्त से
लथ-पथ, लथ-पथ, लथ-पथ,
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!
— हरिवंश राय बच्चन

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३) बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।
-कबीर दस

४) बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर ॥
-कबीर दस

५) “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय |
टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय”
— रहीम

आखिर में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय दोहा 🙂

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में परलय होएगी, बहुरी करोगे कब?
— कबीर दस

Priyanka

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