कोरोना वायरस, अकेलापन और तनाव

कोरोना वायरस के साथ जूझते हुए हमे एक साल से ज़्यादा हो गया । ठहरी हुई ज़िन्दगी, रुके हुए काम , बंद हुए व्यापार और अनेको पारिवारिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करते हुए हमने कोरोना वायरस के साथ भी समझौता करके जीना सीख लिया था क्यूँकि बात खुद कि और परिवार की सुरक्षा की थी, पर ये दूसरी लहर तो बहुत ही घातक साबित हुई ।

और यह समझौता भी कोई कितने दिनों तक गले लगाए घूमे ? धीरे धीरे लोगो का मनोबल टूट रहा है, धीरज छूट रहा है । कितनो ने अपनों को खोया है और कितने अपनों ने एक दुसरो को महीनो से नहीं देखा , मेरे खुद के पिताजी श्री लंका में रहते है, कोविद हुआ तबसे वहां से भारत आने जाने की कोई व्यवस्था न होने के कारण हम उनसे पुरे साल नहीं मिल पाए ।

बड़ी मुश्किल से विसा मिला पर दो बार टिकट कैन्सल करनी पड़ी क्यूँकि घर में कुछ ना कुछ होता आ रहा है की हम पापा के पास जा ही नहीं पा रहें है।

पापा वहा अकेले है, खाना बनाना ज्यादा आता नहीं था और शुगर भी है पर उन्होंने अपने आप को सम्भाला हुआं है। वे वहाँ अकेले होकर भी यहाँ हम सबको सतर्क रखते हैं, प्रीकॉशन्स लेते रहने कहते हैं, क्यूँकि जो परिवार से दूर है उसे ये डर और तनाव ज्यादा सताता है।

कई ऐसे लोग है जो विपरीत परिस्थितियों में दिन निकाल रहे है , और कोविद मास्क के साथ एक और मास्क लगाए घूम रहे है , चिंता, डर और तनाव का। किसी की नौकरी चली गई, किसी को तनख्वा आधी मिल रही है , किसी के घर में कोई कोरोना का शिकार हो गया, किसी को व्यापर में बुरा घाटा हुआ, कोई पति और ससुराल वालों के हाथों अत्याधिक हिंसा का शिकार हुआ क्यूँकि सब घर पर ही है ।और बच्चों की अलग परेशनियाँ।

ऐसे में ज़िन्दगी का दम घुटने लगता है, और बहार जाये भी कहा जाए कोई, पहली बार यु हुआ है की आप किसी के पास जाओ तो वो भी डरेगा की आप अपने साथ कोरोना न ले आओ।

किस किस पर हुआ कोरोना का असर

या यह कहे की कौन बच पाया इसके असर से ? कोरोना वायरस के असर से बचा तो कोई भी नहीं है उल्टा इस त्रासदी का सब पर कही न कही गहरा असर हुआ है । बच्चो से लेकर बुजुर्गों तक सब इससे परेशान रहे और आज भी है।

बच्चो पर अनगिनत पाबंदिया लग गयी, जिस मोबाइल और स्क्रीन टाइम से हम उन्हें दूर रखने में जुटे रहते थे, हमे खुद उसका आदि होना सीखना पड़ा, और उन्हें भी सिखाना पड़ा। बाहर खेलना कूदना बंद होगया और बाकि सारि एक्टिविटीज पर भी रोक लग गयी , जिस वजह से बच्चो में भी चिडचिड़पन और तनाव देखा जा रहा है ।

बुजुर्गो पर भी कोरोना ने गहरा असर किया, दिन भर बढ़ते केसेस की खबरे, रिश्तेदारों से फ़ोन पर बातें कर के उनकी फिकर और बहार टहलने तक न जाने पाने की रोक थाम ने उनपर भी गहरा तनाव छोड़ा । बड़े बुजुर्गो के लिए यह बात तो एकदम ही नयी थी की ऐसा कुछ हो सकता है की दुनिया ही थम जाये और फिर अंदर ही अंदर डर और घुटन की वजह से घर के बड़े सदस्यों में काफी तनाव देखा जा रहा है ।

घर के बाकि लोगो पर काम का बोझ और घर और ऑनलाइन काम का संतुलन बनाये रखने की चुनौती बढ़ने लगी तो कही दिन भर सबका साथ रहना किसीके मानसिक स्वास्थय पर असर करने लगा ।

लोगो से कम मिल पाना और अपने दोस्तों से कम जुड़ पाने की वजह से बहुत से लोग अकेलापन महसूस करने लगे है , ऐसे में एक दूसरे का ख्याल रखना बेहद जरुरी है । अपने और अपने आस पास के लोगो की तरफ ध्यान दे और अगर कोई अकेलेपन या तनाव की शिकायत करें या नेगेटिव सी बातें करें तो उनपर विशेष ध्यान दे.

हमें हमारे पुराने वाले नार्मल में जाने में थोड़ा वक़्त लग सकता है , पर जब तक हम ज़िंदगी में है, हमें इसमें बने रहना है, ऐसा समझ के आगे बढ़े और अपने स्वास्थय का ख्याल रखें । थोड़ी बहुत सतर्कता और सूझ बुझ के साथ हम इसे भी पार कर लेंगे।

अपना और अपने आस पास के लोगो का ख्याल रखें, कोई सवाल या सुझाव हो तो निचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखें।

प्रियंका

सैनिटी डेली

3 thoughts on “कोरोना वायरस, अकेलापन और तनाव

  1. Corona की वजह से जो तनाव, डर, घबराहट, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, आदि चीजें जो हो रहीं हैं वो बहुत सारी अन्य समस्याओं को जन्म देती हैं, हम सभी इससे जूझ रहे हैं, भगवान करे जल्दी से खत्म हो ये सब ।
    आप फिक्र मत करो, आपने पापा सुरक्षित होंगे, और जल्द ही उनसे मुलाकात भी होगी, मुश्किल समय जरूर है पर ये भी गुजर जाएगा।
    बस भगवान हमें इससे जूझने और उबरने में मदद करें।

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