‘इश्क़’ लिखो 

उसके दर पर कविताएँ लौट रहीं थी, झाँक कर देखा तो अब भी उस में गुज़रे हुए वक़्त कि कुछ सिलवटें बाक़ी ज़रूर थी, पर उसके ठीक पीछे कही एक नया कोरा पन्ना अंगड़ाई ले रहा था .. जो कह रहा था कुछ नया ताज़ा लिखो, जो कभी ना लिखा हो वो लिखो, दिल टूटने … Continue reading ‘इश्क़’ लिखो 

कैसे रख सकते है अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल?

यदि आप ध्यान से सोचते हैं, तो आपको महसूस होगा कि हम अपने अच्छे मानसिक स्वास्थ्य को संजो के रखने के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। इस ब्लॉग में, मैं मानसिक स्वास्थ्य की अच्छी देखभाल कर पाने के लिए कुछ टिप्स साझा करुँगी। इससे पहले कि मैं आपके साथ कुछ टिप्स साझा करूं, मैं … Continue reading कैसे रख सकते है अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल?

मौन और शोर के बीच की स्थिरता

ऊपर खुला आसमान था और नीचे हरियाली का डेरा था मन में बेचैनी और हाथ में चाय का प्याला लिए मैंने एक सपना देखा खुली आँखो से देखे सपने फिर से जीने की उम्मीद दे जाते हैं इतनी उथल पुथल और उधेड़बुन के बीच भी अपनी सोच में एक स्थिरता को देखा कितना कुछ होकर … Continue reading मौन और शोर के बीच की स्थिरता

फूलों का एक बिछावन

ना कहीं जाने की जल्दी ना कही पहूचने का विचार ना मुझे कोई ढूंढने वाला ना किसी को मेरा इंतज़ार आगे भी मैं पीछे भी मैं मानो फूलों का एक बिछावन हो और उसे देखते हुए मुस्कुराती सी मैं कुछ बिखरे हुए फूलों की सुंदरता और इनके बीच बिखरी सौंधी सी ख़ुशबू के भीतर की … Continue reading फूलों का एक बिछावन