गुलाल

आ सखी तुझे रंग लाल लगा दूँ मैं तेरे चेहरे पर थोड़ा गुलाल लगा दूँ तुझे भी कभी भाते होंगे रंग होली के प्रेम से भरे, हँसी ठिठोली के आ तेरी इस सफ़ेद सारी से मैं थोड़ा मलाल मिटा दूँ मैं तेरे चेहरे पर थोड़ा गुलाल लगा दूँ तू सिमट जाती है ख़ुद में ही … Continue reading गुलाल

क्या मैं ख़ुश होती?

आज अगर मैं लिख ना रही होती तो शायद मेरी ज़िंदगी कुछ और होती, पर कैसी वाली और? जैसी लोगों को पसंद आती है वैसी या जैसी लोगों के समझ में फ़िट हो पाती है वैसी? मैं लिखती नहीं तो शायद आज मैं कही जॉब कर रही होती पर क्या मैं ख़ुश होती? मैं आज … Continue reading क्या मैं ख़ुश होती?