अब डर नहीं लगता

अब मुझे डर नहीं लगता गिर जाने सेअकेले चलने सेथकने सेहारने सेरोने से मैंने ये खेल खेलना नहीं सीखापर हर खेल को नया रूप देना सीख लिया है मुझे शुन्य से अब डर नहीं लगताखुद को बार बार खड़ा करने से डर नहीं लगता वो हद बहुत पीछे छूट गयीजिस हद ने मेरी सीमा तय … Continue reading अब डर नहीं लगता

नाराज़ है प्रकृति

सोचा की आज तुझे थोड़ा निहार लू दो पल तेरी खुशबू में खो जाऊ मन किया की आज कुछ देर तेरी छाँव में सो जाऊ तू कुछ नाराज़ सी मालूम होती है मुझे तू बहुत ही व्याकुल सी जान पड़ती है हा तेरी नाराज़गी भी जायज़ है तू मुफ्त में जो मिल जाती है अपने … Continue reading नाराज़ है प्रकृति