नाराज़ है प्रकृति

सोचा की आज तुझे थोड़ा निहार लू दो पल तेरी खुशबू में खो जाऊ मन किया की आज कुछ देर तेरी छाँव में सो जाऊ तू कुछ नाराज़ सी मालूम होती है मुझे तू बहुत ही व्याकुल सी जान पड़ती है हा तेरी नाराज़गी भी जायज़ है तू मुफ्त में जो मिल जाती है अपने … Continue reading नाराज़ है प्रकृति

आख़िर यह मसला क्या है

हर बात बस यही रुक जाती हैये जद्दोजहद का मसला क्या है क़ुरान-ए-पाक और श्रीमदभगवत गीता में ये चर्चा कहा हैइस मिटटी में सोना पनपता था जो कभीजिस धरोहर की दुहाई ज़माना दिया फिरता है उस गुल-ए-हिंदुस्तान का आखिर ये सियासती मसला क्या है गंगा जमुनी से यह उर्दूगुरबानी की मिठास में रूह सजोती हुईजाप … Continue reading आख़िर यह मसला क्या है