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नियत पर सवाल – कविता

नियत पर सवाल

यह जो वक़्त मैंने कुछ कहने और सुनने में बिताया है
यह वो अनमोल पल है जो मैंने किसी के साथ ना बिताया है

गौर फरमाइयेगा…

यह  जो वक़्त मैंने कुछ कहने और सुनने में बिताया है
यह  वो अनमोल पल है जो मैंने किसी के साथ ना बिताया है

यह  वक़्त मेरी नन्ही सी गुड़िया का हो सकता था
मेरी सहेलियों के संग हंसी ठिठोलियों का हो सकता था

यह  वक़्त मेरे महबूब के ख्याल में गुजर सकता था
या बस यही अकेले बैठे हुए सुकूं से गुज़र सकता था

पर मैंने इस पल में कुछ और साँसे डालने की ज़ेहमत उठाई है
अपनी कलम की ताक़त को पहचानते हुए अपनी एक दुनिया बनाई है

कुछ दर्द कम कर सकू किसी का
बस इतना सा अरमान है

दिल साफ़ है मेरा
ये मान लेना क्या इतना मुश्क़िल काम है?

यूही कोई कलम तोड़ने के मुझे मुआवज़े नहीं देता
ना ही मेरे घर का दिया मेरी बातों से जलता है

पर ये बस मेरा जूनून है
कुछ अच्छा कहकर मिलता मुझे एक सुकूं है

जिसपर सवाल उठाना सबसे आसान है
बातो का बवाल बनाना तो और भी आसान है

गलतियां करते हुए ही इंसान ऊपर उठता है
मुँह के बल गिर कर ही अगली बार संभालता है

मेरी मेहनत और मेरी नियत पे सवाल उठाने वालो
कभी आइना देख लेना और बस एक सवाल पूछ लेना

की मैंने सही किया? जो किया सो किया
पर क्या वो सही किया

जवाब जो मिल जाये तो उसे सुन लेना
बहुत दबाने की कोशिश करोगे तुम उस आवाज़ को
क्यूकि सच सुनना कौन चाहता है

कठिन रास्तो पे संग चलना चाहता कौन है
आसान सी चीज़ो को सराहना चाहता कौन है
जो जैसा है उसे वैसा देखना चाहते कौन है

प्रियंका©

10 thoughts on “नियत पर सवाल – कविता

  1. Priyanka बहुत अच्छा लिखा। लिखने का मुआवजा कौन देता है…बहुत उम्दा। हर समय उँगली उठाने वालों को सटीक जवाब।

  2. Dil ki kalam se
    Alfaaz jo bahe aaj
    Goonj bhale hi na thi
    Dil ke kuch choo gaye saaz
    Zamane ki parvah
    Na ki thi us roj
    Chale chal aye dost mere
    Rasta bohot khubsurat hai yeh.

  3. This is called “Pen Bomb”! It makes the sound with “Boom” for those who underestimate its power but pens down for those who really value it. Karara jawab!

Your comments make my day 💜

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