क्या है मिथ्या

जीने का अरमान या मौत सा सुकूं उजाले की किरण या अँधेरे की चुभन है सब माटी का माटी में ही मिल जाना है किसका भय है क्यों न तू निर्भय है जीवन पथ पर कांटे हज़ार है पर तू चल निस्चल अपनों से लड़ या अपने लिए लड़ पर तू कर हासिल जीत हर …

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