Tag Archive | hindi poem

My First Poetry Book- Ardhaviram

Hi everyone,

How are you all? No matter where I go, what I do, but this blog holds a very very special place for me, so here I am happily sharing my little achievement which I was postponing for a long time.

I was away from my blogs for a while as I was busy reshuffling my priority list and decluttering things that’s doesn’t spark any joy in my life.

In this process, I prioritized a long due wish I wanted to be fulfilled, of course only I could have done it for myself 🙂

I have been writing a lot from the past few years, but poetries made a special place in my life, it filled that vacuum created by all the external factors, it helped me heal.

With all your love and support, I decided to take yet another plunge and here I present to you all my first ever Hindi Poetry Book “Ardhaviram” published via Notion Press Publishing and is live now.

It will be soon available at Amazon and Flipkart too.

As a promotional deal, I am offering a 21% discount on the first few purchases of my book.

Apply this Coupon Code “GOFORIT” when you purchase the book and yes it’s a Paperback 🙂

I would love to hear from you all! Ab ye Kitaab aap sab ke hawale 🙂

https://notionpress.com/read/ardhaviram

Thank you so much!

Much love and gratitude

Priyanka Nair

नाराज़ है प्रकृति

सोचा की आज तुझे थोड़ा निहार लू
दो पल तेरी खुशबू में खो जाऊ
मन किया की आज कुछ देर तेरी छाँव में सो जाऊ
तू कुछ नाराज़ सी मालूम होती है मुझे
तू बहुत ही व्याकुल सी जान पड़ती है
हा तेरी नाराज़गी भी जायज़ है
तू मुफ्त में जो मिल जाती है
अपने होने का एहसास नहीं जताती है
तो बस सब तुझे मान कर चलते है
बस अब और ज्यादा कुछ न कहते हुए
तुझसे अपना प्यार जताती रहती हु
तेरे निस्वार्थ प्यार के लिए मैं बस तुझे धन्यवाद् कहती हु

-प्रियंका

आख़िर यह मसला क्या है

हर बात बस यही रुक जाती है
ये जद्दोजहद का मसला क्या है

क़ुरान-ए-पाक और श्रीमदभगवत गीता में ये चर्चा कहा है
इस मिटटी में सोना पनपता था जो कभी
जिस धरोहर की दुहाई ज़माना दिया फिरता है
उस गुल-ए-हिंदुस्तान का आखिर ये सियासती मसला क्या है

गंगा जमुनी से यह उर्दू
गुरबानी की मिठास में रूह सजोती हुई
जाप और मंत्रो की माला पिरोती हुई
इस हिंदुस्तान की ज़मी पर ये तस्कीन-ए-अना का मसला क्या है

भाई भाई सा रिश्ता न सही इंसानियत ही बरक़रार रख ले हम
की आने वाली पीडियो को इंसानियत पे थोड़ा यकीं तो रह जाए
यही सीख पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे हाथो बहती जाए
तो क्या पता एक दिन ये तख़्त-ओ-ताज का किस्सा ही ख़तम हो जाए

–प्रियंका©