प्रति – योगिनी

यह पल एक जीवन शाला है इसके तृण तृण में सार समाया है कुछ मिथ्या है तो कुछ सत्य कुछ मिलावट है तो कही थोड़ी सजावट है रोज़ नए पाठ पढ़ाते हुए हर एक क्षण का हिसाब लगाते हुए समय की सुई के साथ कदम मिलाते हुए बस चलते जाना है जो ये खेल है …

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