Virtual Siyahi

वजूद – Existence

अपने अस्तित्व की तलाश में निकला था ये वजूद, रास्ते में लोग जुड़ते गए और कुछ छूटते गए .फिर भी चलता रहा ये वजूद अपनी ही एक तलाश में

प्रकृति और जीवन

प्रकृति का अध्ययन, प्रकृति से प्रेम , प्रकृति के करीब रहना यह आपको कभी भी विफल नहीं करेगा. प्रकृति में गहराई से देखो, और फिर आप सब कुछ बेहतर समझ जायेंगें।

The HERO of my life!

This short story is entirely dedicated to my father, we rarely express our love and respect for our father through poetries and write-ups, so through

Humsafar

Shikva bhi tumse hai shikayat bhi tumse hai
dard bhi tum ho aur marham bhi tum ho…

प्रति – योगिनी

यह पल एक जीवन शाला है इसके तृण तृण में सार समाया है कुछ मिथ्या है तो कुछ सत्य कुछ मिलावट है तो कही थोड़ी